छत्तीसगढ़ के संवेदशील मुख्यमंत्री डॉक्टर श्री रमनसिंह जी का शिक्षाकर्मियो के संविलियन को लेकर साफ शब्दों में एक लाख अस्सी हजार शिक्षाकर्मियों को कह दिया है किशिक्षाकर्मियों का संविलियन शिक्षा विभाग में नहीं किया जा सकता क्योंकि इनकी सेवा शर्तों में यह शामिलनहीं है इस तरह की मुंख्यमंत्री की घोषणा ने शिक्षाकर्मियों की निराश किया है दूसरी ओरउनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है |
गत वर्ष प्रधान पाठक परीक्षा के माध्यम से शिक्षाकर्मियों को शिक्षा विभाग प्रधान पाठक के रूप में लिया है और अपने संकल्प पत्र के अनुरूप, सुभाष स्टेडियम रायपुर में आयोजित सम्मान समारोह में शिक्षाकर्मियों ,मीडिया ,पत्रकारों ,मंत्रियों के बीच डॉ. रमनसिंह जी ने अपने उदबोधन में इस बात का एलान किया था कि
की भविष्य में प्रदेश में कार्यरत शिक्षाकर्मियों में २०% शिक्षाकर्मियों को शिक्षा विभाग, आदिमजाति कल्याण विभाग में संविलियन किया जायेगा किन्तु आज आपके द्वारा इस तरह का कथन समझ से परे है |
प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री डॉ. श्री रमन सिंहजी हमारें राज्य को देश के सभी क्षेत्रों में अग्रणी राज्य के के रूप में प्रतिष्ठित करने सफलता पाई है|किन्तु शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक को कई नाम दिए गए साथ ही साथ नियमित शिक्षक और शिक्षाकर्मी के वेतन , सुविधाओं में काफी अंतर कर दिया गया जो असंतोष का मूल कारण है| महंगाई अपनी चरम उत्कर्ष पर हैशिक्षाकर्मियों को अल्प वेतन का भुगतानअनियमित होना सारी सुविधाओं से वंचित होना ही आन्दोलन कि राह पर चलने के लिए मजबूर करती है ओर समय समय पर इनके आन्दोलन दिखाई देते है सरकार ओर जनता इनकी समस्याओं को समझने कि बजाय छात्र छात्राओं कि दुहाई देकर आन्दोलन ख़त्म करने कि अपील करते है शिक्षाकर्मियों के आन्दोलन को गलत समय में लिया गया निर्णय कहकर शिक्षाकर्मियों के प्रति सहानुभूति भी नहीं रखते है| बल्कि उन्हें कई नए नामों से विश्लेषित कर दिया जाता है शिक्षाकर्मियों को जो अल्प वेतन मिलता है उस अल्प वेतन का भुगतान भी समय पर नहीं होता,और न ही प्रति माह नियमित रूप से वेतनमिलता है | आदरणीय शिक्षामंत्री श्री बृजमोहन अग्रवालजी ने वेतन भुगतान के संबध में कहा था कि शिक्षाकर्मियों का वेतन भुगतान का सरलीकरण करते हुए कोषालय के माध्यम से
किया जायेगा लेकिन आज तक उनकी यह बात, बात के रूप में रह गई |जबकि इस तरह कोषालय से भुगतान में किसी तरह की दिक्कत नहीं है क्योंकि वेतन बिल कोषालय से ही जारी होते है,सीधे वंही से शिक्षाकर्मियों के बैंक खातें में अन्य कर्मचारियों की तरह जमा हो सकते है| क्योकि आंबटन कोषालय में रहता ही है |
आदरणीय संवेदनशील मुख्यमंत्री जी इन वचनों पर हरिभूमि में त्वरित टिप्पणी में डॉ.हिमांशु द्विवेदी जी ने ' कोयल के कंठ से कर्कश स्वर 'में शिक्षाकर्मियों की सारी समस्याओं ,उनके आन्दोलन ,सरकार के द्वारा इस आन्दोलन को कुचलने के लिए उठाये गए क़दमों एस्मा का खौफ आदि बातों पर विस्तार से कही है शिक्षाकर्मियों का प्रदेश में अन्य कर्मचारियों के साथ तुलना कर शिक्षक और शिक्षाकर्मी का अंतर बताकर शिक्षाकर्मियों के दर्द को कहा है | में डॉ. हिमाशु द्विवेदी जी के विचारों से पूरी तरह से सहमत हूँ और उन्हें उनके शिक्षाकर्मियों के प्रति सुविचारों के लिए धन्यवाद् देना चाहता हूँ |
शंकर गोयल
shankar.pithora@mail.com
MOBILE NO.9424235208
गत वर्ष प्रधान पाठक परीक्षा के माध्यम से शिक्षाकर्मियों को शिक्षा विभाग प्रधान पाठक के रूप में लिया है और अपने संकल्प पत्र के अनुरूप, सुभाष स्टेडियम रायपुर में आयोजित सम्मान समारोह में शिक्षाकर्मियों ,मीडिया ,पत्रकारों ,मंत्रियों के बीच डॉ. रमनसिंह जी ने अपने उदबोधन में इस बात का एलान किया था कि
की भविष्य में प्रदेश में कार्यरत शिक्षाकर्मियों में २०% शिक्षाकर्मियों को शिक्षा विभाग, आदिमजाति कल्याण विभाग में संविलियन किया जायेगा किन्तु आज आपके द्वारा इस तरह का कथन समझ से परे है |
प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री डॉ. श्री रमन सिंहजी हमारें राज्य को देश के सभी क्षेत्रों में अग्रणी राज्य के के रूप में प्रतिष्ठित करने सफलता पाई है|किन्तु शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक को कई नाम दिए गए साथ ही साथ नियमित शिक्षक और शिक्षाकर्मी के वेतन , सुविधाओं में काफी अंतर कर दिया गया जो असंतोष का मूल कारण है| महंगाई अपनी चरम उत्कर्ष पर हैशिक्षाकर्मियों को अल्प वेतन का भुगतानअनियमित होना सारी सुविधाओं से वंचित होना ही आन्दोलन कि राह पर चलने के लिए मजबूर करती है ओर समय समय पर इनके आन्दोलन दिखाई देते है सरकार ओर जनता इनकी समस्याओं को समझने कि बजाय छात्र छात्राओं कि दुहाई देकर आन्दोलन ख़त्म करने कि अपील करते है शिक्षाकर्मियों के आन्दोलन को गलत समय में लिया गया निर्णय कहकर शिक्षाकर्मियों के प्रति सहानुभूति भी नहीं रखते है| बल्कि उन्हें कई नए नामों से विश्लेषित कर दिया जाता है शिक्षाकर्मियों को जो अल्प वेतन मिलता है उस अल्प वेतन का भुगतान भी समय पर नहीं होता,और न ही प्रति माह नियमित रूप से वेतनमिलता है | आदरणीय शिक्षामंत्री श्री बृजमोहन अग्रवालजी ने वेतन भुगतान के संबध में कहा था कि शिक्षाकर्मियों का वेतन भुगतान का सरलीकरण करते हुए कोषालय के माध्यम से
किया जायेगा लेकिन आज तक उनकी यह बात, बात के रूप में रह गई |जबकि इस तरह कोषालय से भुगतान में किसी तरह की दिक्कत नहीं है क्योंकि वेतन बिल कोषालय से ही जारी होते है,सीधे वंही से शिक्षाकर्मियों के बैंक खातें में अन्य कर्मचारियों की तरह जमा हो सकते है| क्योकि आंबटन कोषालय में रहता ही है |
आदरणीय संवेदनशील मुख्यमंत्री जी इन वचनों पर हरिभूमि में त्वरित टिप्पणी में डॉ.हिमांशु द्विवेदी जी ने ' कोयल के कंठ से कर्कश स्वर 'में शिक्षाकर्मियों की सारी समस्याओं ,उनके आन्दोलन ,सरकार के द्वारा इस आन्दोलन को कुचलने के लिए उठाये गए क़दमों एस्मा का खौफ आदि बातों पर विस्तार से कही है शिक्षाकर्मियों का प्रदेश में अन्य कर्मचारियों के साथ तुलना कर शिक्षक और शिक्षाकर्मी का अंतर बताकर शिक्षाकर्मियों के दर्द को कहा है | में डॉ. हिमाशु द्विवेदी जी के विचारों से पूरी तरह से सहमत हूँ और उन्हें उनके शिक्षाकर्मियों के प्रति सुविचारों के लिए धन्यवाद् देना चाहता हूँ |
शंकर गोयल
shankar.pithora@mail.com
MOBILE NO.9424235208


