ग़ज़ल

शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

शिक्षाकर्मियों का आन्दोलन

छत्तीसगढ़ के  संवेदशील  मुख्यमंत्री डॉक्टर श्री रमनसिंह जी का शिक्षाकर्मियो के संविलियन को लेकर साफ शब्दों  में एक लाख अस्सी हजार शिक्षाकर्मियों को कह दिया है  किशिक्षाकर्मियों का संविलियन शिक्षा विभाग में नहीं किया जा सकता क्योंकि इनकी सेवा शर्तों में यह शामिलनहीं है  इस तरह की मुंख्यमंत्री की घोषणा ने शिक्षाकर्मियों की निराश किया है दूसरी ओरउनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है |                 
                                                   गत वर्ष प्रधान पाठक परीक्षा के माध्यम से शिक्षाकर्मियों को शिक्षा विभाग प्रधान पाठक के रूप में लिया है और अपने संकल्प पत्र के अनुरूप, सुभाष  स्टेडियम रायपुर में आयोजित सम्मान समारोह में शिक्षाकर्मियों ,मीडिया ,पत्रकारों ,मंत्रियों के बीच डॉ. रमनसिंह जी ने अपने उदबोधन में इस बात का एलान किया था कि 
                 की भविष्य में  प्रदेश में कार्यरत शिक्षाकर्मियों में  २०% शिक्षाकर्मियों को शिक्षा विभाग,  आदिमजाति कल्याण  विभाग में संविलियन किया जायेगा किन्तु आज आपके  द्वारा  इस तरह का कथन समझ से परे है |
                                  प्रदेश के संवेदनशील  मुख्यमंत्री डॉ. श्री रमन सिंहजी  हमारें  राज्य को देश के सभी क्षेत्रों में अग्रणी राज्य के के रूप में प्रतिष्ठित करने सफलता पाई है|किन्तु शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक को कई नाम दिए गए साथ ही साथ   नियमित शिक्षक और शिक्षाकर्मी के वेतन , सुविधाओं में काफी  अंतर कर दिया गया  जो  असंतोष का मूल कारण है| महंगाई अपनी चरम उत्कर्ष पर हैशिक्षाकर्मियों को अल्प वेतन का भुगतानअनियमित होना सारी सुविधाओं से वंचित होना ही आन्दोलन कि राह पर चलने के लिए मजबूर करती है ओर समय समय पर इनके आन्दोलन दिखाई देते है सरकार ओर जनता इनकी समस्याओं को समझने कि बजाय  छात्र छात्राओं कि दुहाई देकर आन्दोलन ख़त्म करने कि अपील करते है शिक्षाकर्मियों के आन्दोलन को गलत समय में लिया गया निर्णय कहकर शिक्षाकर्मियों के प्रति सहानुभूति भी नहीं रखते है| बल्कि उन्हें कई नए नामों से विश्लेषित कर दिया जाता है शिक्षाकर्मियों को जो अल्प वेतन मिलता है उस अल्प वेतन  का भुगतान भी समय  पर नहीं होता,और न ही  प्रति माह नियमित रूप से  वेतनमिलता  है |  आदरणीय शिक्षामंत्री श्री बृजमोहन अग्रवालजी ने वेतन भुगतान के संबध में कहा था कि शिक्षाकर्मियों का वेतन भुगतान का सरलीकरण करते हुए कोषालय के माध्यम से 
किया जायेगा लेकिन आज तक उनकी यह  बात, बात के रूप में रह गई |जबकि इस तरह कोषालय से भुगतान में किसी तरह की दिक्कत नहीं है क्योंकि वेतन बिल कोषालय से ही जारी होते है,सीधे वंही से शिक्षाकर्मियों के बैंक खातें में अन्य कर्मचारियों की तरह जमा हो सकते है| क्योकि आंबटन कोषालय में रहता ही है | 
                    आदरणीय संवेदनशील मुख्यमंत्री जी इन वचनों पर हरिभूमि में त्वरित टिप्पणी में डॉ.हिमांशु द्विवेदी जी ने ' कोयल के कंठ से कर्कश स्वर 'में शिक्षाकर्मियों की सारी समस्याओं ,उनके आन्दोलन ,सरकार के द्वारा इस आन्दोलन को कुचलने के लिए उठाये गए क़दमों एस्मा का खौफ आदि बातों पर विस्तार से कही है शिक्षाकर्मियों का प्रदेश में अन्य कर्मचारियों के साथ तुलना कर शिक्षक और शिक्षाकर्मी का अंतर बताकर शिक्षाकर्मियों  के दर्द को कहा है | में  डॉ. हिमाशु द्विवेदी जी के विचारों से पूरी तरह से सहमत हूँ और उन्हें  उनके शिक्षाकर्मियों के प्रति सुविचारों के लिए धन्यवाद् देना चाहता हूँ |




                                                                                               शंकर गोयल 
                                                                                shankar.pithora@mail.com
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शनिवार, 5 नवंबर 2011

ग़ज़ल

                       ग़ज़ल 
हमारा देश किस ओर जा रहा है दोस्तों,
इसे भ्रष्टाचार दीमक की तरह खा रहहि दोस्तों|
अन्ना का दल देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ,
जनता के बीच अलख जगा रहा है दोस्तों|
आंकठ डूबे है देश के नेता भ्रष्टाचार में,
हर कोई इन पर तोहमत लगा रहा है दोस्तों|
जनसेवक का तमगा लगाये बैठे है ये लोग,
इसलिए देश इनके नखरें उठा रहा है दोस्तों|
भ्रष्टाचार लाईलाज बीमारी नहीं है दोस्तों,
युवा पीढ़ी जनवादी गीत गा रही है दोस्तों|
                                      शंकर गोयल
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बुधवार, 2 नवंबर 2011

रावण आज अनेक है राम बना न कोई,

अनर्थ देश में हो रहा धरतीमाता रोई |

कलयुग में भी कैसी प्रभु की माया है ,

मंदिरों में पड़ रही रावण की छाया है |
                                                शंकर गोयल 
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सोमवार, 31 अक्टूबर 2011

ग़ज़ल

         ग़ज़ल 
हमको हाथ बढ़ाना होगा,
सपनों  को सजाना होगा|
शहीदों की बात न कर,
उन जैसा बन जाना होगा|
स्वतंत्रता के शहीदों की ,
जनमन को याद दिलाना होगा|
उनके सपनों का हो भारत मेरा,
हमें खून पसीना बहाना होगा|
देशवासी है सभी इसलिए ,
नफरत की दीवार ढहाना होगा|
देश रक्षा के लिए 'शंकर' ,
कुर्बानियों का अलख जगाना होगा|
                                  शंकर गोयल
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शनिवार, 22 अक्टूबर 2011

दिवाली की बधाई



दिवाली की बधाई
अपनों की ही बात हो,
खुशियों की बारात हो,
 हिंसा  पर आघात हो,
शांति  की ही बात हो,
इस दीपावली में ,
धन की बरसात हो|
                    शंकर गोयल 
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मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011

ग़ज़ल शरद पूर्णिमा पर विशेष ......

ग़ज़ल शरद पूर्णिमा पर विशेष ...........
           आसमां से अमृत बरसेगा , चाँद का मन भी हरसेगा|
        जीवन के स्वप्न चित्रों में ,कर्मतुलिका से रंग बरसेगा |     
   शरद पूर्णिमा के इस अवसर पर ,अब चकोर नहीं तरसेगा |
       हर मन की प्यास बुझाने को, आनंद ही आनंद बरसेगा|
                                              शंकर गोयल 
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सोमवार, 10 अक्टूबर 2011

ग़ज़ल सम्राट जगजीतसिंह जी को श्रद्धा सुमन अर्पित

     मेरी आवाज ही पर्दा है, मेरे चेहरे का,
    में हूँ खामोश जंहाँ,मुझको वहाँ से सुनियें |
                                                            शंकर गोयल 
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शनिवार, 30 जुलाई 2011

बम हमला

                       बम हमला             
                         

पाक में ज्यादा हमले होते है,
आंतक के बीज वही बोते है|
जब देश में धमाके होते है,
हम अपने लोगो को खोते है |
बम हमलो के बाद देश के,
नेता अपने बयानों में ही रोते है|
अदालती कानून के नाम पर,
हम अजमल-कसाबको ढोते है|
अपने देश के नेता सोते है,
धमाकोकी बातो  में ही खोते है| 

                           शंकर गोयल
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शुक्रवार, 29 जुलाई 2011

मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती पर विशेष



मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती पर विशेष


अमर कथाशिल्पी व उपन्यास सम्राट मुंशी  प्रेमचंद जी की 133वीं जयंती आ रही है  ऐसे समय में अमरकथा शिल्पी के विचारों की प्रांसगिकता व महत्ता और   अधिक  बढती जा  रही   है|  उस समय  किसानों व मजदूरोंकी स्थिति के बारे में समाज की दशा व दिशा देने का कार्य तत्कालीन साहित्यकारों ने पूरी ईमानदारी से निर्वहन किया लेकिन आज देश का युवावर्ग अपने दायित्वों से भटक गया जिसके कन्धों पर देश की रक्षा ,विकास अन्य क्षेत्रों में महती जिम्मेदारी है क्या आज देश का साहित्यकार वर्ग व शिक्षितवर्ग अपने उत्तरदायित्व को ईमानदारी से निभा रहे है |युवाओं को दायित्वबोध करा रहे है यह एक विकराल व विचारणीय यक्ष प्रश्न है |
आज जब इस प्रश्न का उत्तर खोज रहा हूँ व चिंतन मनन कर रहा हूँ तो काफी हताशा महसूस होती है . आज हर कोई अपने आप में मगन है . किसी देश व समाज दिशा व दशा की चिंता नहीं है और न ही युवावर्ग के नैतिक व चारित्रिक पतन के कारणों को जानने व रोकने के लिए कोई सोंच है| मेरे मन में सदैव एक सवाल उठता था| मैं जब जब मुंशीप्रेमचंदजी जीवन परिचय को पढता था मुझे हमैशा यह लगता था की मुंशीजी इन कहानियों में ऐसा क्या लिखा है जिसके चलते मुंशी प्रेमचंद जी को नवाब राय से मुंशी प्रेमचंद के नाम से लेखन शुरू करना पड़ा | मुंशी प्रेमचंद जी ने आज से १०२ वर्ष पूर्व नवाबराय के नाम से उर्दू पत्रिका ' जमाना 'में 'सोजे वतन ' याने देश का दर्द 'नामसे पांच कहानियों का संग्रह निकला था जिसके चलते तत्कालीन अंग्रेज सरकार की चूलें हिल गई थी खुफिया तंत्र नवाबराय की खोज में लग गई सोजे वतन में सबसे छोटी कहानी का शीर्षक 'दुनिया का सबसे अनमोल रतन ', 'शेख मखमूर ',' यंही मेरा वतन 'सोक  का पुरस्कार '',' सांसारिक प्रेम और देशप्रेम था इनपांच कहानियों में ऐसा क्या था जिसने अंग्रेज सरकार को हिलाकर रख दिया |
ख़ुफ़िया तंत्र नवाब राय की खोज करता रहा आख़िरकार नवाब राय सरकारी लाजिम थे पुलिस नवाब राय को खोज निकाला! दर्द की एक चीख की तरह ये कहानिया जब एक छोटे से किताब की शक्ल में आज से १०२ वर्ष पूर्व निकली वह ज़माना और था आजादी की बात भी उन दिनों हाकिम का मुंह देखकर कहने का रिवाज थी| कुछ लोग इस रिवाज को नहीं मानते है मुंशी प्रेमचंद उन सिरफिरों में से एक थे| 
सोजे वतन की रचना सरकारी नौकरी करते हुए मुंशी प्रेमचंद जी ने नवाबराय के नाम से लिखी थी ख़ुफ़िया पुलिस ने सुराग लगा लिया की नवाबराय कौन है हमीरपुर के कलेक्टर ने मुंशी जी क फ़ौरन बुलाया मुंशीजी बैलगाड़ी से रातो रात हमीरपुर के कुलपहाड़ तहसील पहुंचे उन दिनों कलेक्टर साहब का निवास था कलेक्टर बहुत गरजे और कहा की खैर मनाओ की अंग्रेजी अमलीदारीमें हो , सल्तनत मुगलिया का जमाना नही वरना तुम्हारे हाथ काट लिए जाते |तुम बगावत फैला रहे हो| सोजे वतन की सारी कापियां मंगाई गई  और आग के हवाले कर दी गई |
मुंशीजीके इरादें में हल्की भी आंच नहीं आई यह नाम न सही  हाँ दुःख जरुर होता है बड़ी मेहनत से आठ दस बरस सेवा पोसा एस नाम को लेकिन खैर शायद यही तक साथ था इस नाम  का |और तब प्रेमचंद का जन्म हुआ | मुंशी प्रेमचंद के सोजे वतन में वास्तव में देश का दर्द व् देशभक्ति दिखाई देती है  सोजे वतन कहानी संग्रह की पहली कहानी ' दुनिया का सबसे अनमोल रतन ' शीर्षक से प्रकाशित है|
इस कहानीमें दिलफिगार की कहानी है जिसमे उसकी प्रेमिका दिलफरेब के द्वारा दुनिया की सबसे अनमोल रतन लानेको कहती है सबसे पहले दिलफिगार कालू चोर जिसे सूली की सजा दी जा रही थी उसके आंसू को लाया दूसरी बार सती हुई नारी की राखको लेकर दिलफरेब के पास पहुंचा अंतिम बार भारतमाता की रक्षा में प्राण गंवाते राजपूत सैनिक के खून की बूंद लेकर दिलफिगार अपनी प्रेमिका के पास पहुंचा| और सारा वाकया सुनाया दिलफरेब ने वीर सैनिक जिसने देश रक्षा में अपना लहू दिया उसे ही दुनिया का सबसे अनमोल रतन के रूप में स्वीकार किया | वैसे ही एक कहानी 'यही मेरा वतन 'एक भारतीय अमेरिका में बहुत धन कमाया आखिरी समय अपने वतन में प्राण त्यागे ,इस उद्देश्य से अपने परिवार को अमेरिका में छोड़कर ९० वर्ष की उम्र में भारत आता है भारत में परिवर्तन देखता है उसके मन में हताशा आती है लेकिन सुबह गंगा नहाते जाते लोग व् अन्य चीजो को देखकर है कहता है यही मेरा वतन है और अंतिम समय तक गंगा किनारे कुटिया बनाकर रहता है |
इस तरह देश के दर्द को पिरोया मुंशी प्रेमचंदजी ने अपनी कहानियों में लेकिन आज किसी को भी चिंता नहीं है देश के दर्द की | आज हमें इसके लिए चिंतन-मनन करने की अति आवश्यकता है | मुंशीजी के अंतिम समय के बारे में बनारसीदास चतुर्वेदी जी ने लिखते है की ०८-अक्टूबर १९३६ को मुंशीजी का निधन हुआ उनकी शवयात्रा में काफी कम लोग शामिल थे उनकी शवयात्रा को देखकर किस ने पूछा -कै रहल ?, क्या हुआ ?-उनका जवाब था कोई मास्टर था | यह है हमारी सोच ?

शुक्रवार, 22 जुलाई 2011

बम धमाका
मुंबई में फिर बम  धमाका,
आंतक ने फिर डाला डाका |
आंतकी आते पड़ोस है  से,
और खींचते खुनी खाका |
धरम करम के नाम पर ,
खून बहाते उनके  आका|
अपने आका की नीयत ठीक नहीं,
  वरना   कौन कर सके  बाल भी बाका |
क्रांति  करे जो शांति के लिए ,
वहीसच्चा सपूत है भारतमाँ का |
   
                         शंकर गोयल
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धरती धरा पर धरती है

धरती धरा पर धरती है ,
धरती सब कुछ सहती है|
किसी से कुछ ना कहती है,
ख़ुशी ख़ुशी सब सहती है|
पालनहार धरा है यह,
गंगा सी धरा बहती है|
करम हमारे सहे धरा पर,
खेतों  में हरियाली भरती है|
खुश हो जन, खुश हो मन,
जनमन  की खुशियों में रहती है|
नफरत ना हो इस  धरा पर ,
धरतीमैय्या सबसे कहती है|
धरती धरा पर धरती है ,
धरती सब कुछ सहती है|

               शंकर गोयल
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रविवार, 29 मई 2011

ग़ज़ल


आज़ादी की क्यूँ बात करें हम ,
अपनों पर ही क्यूँ घातकरें हम |
गुलामी की सी हालातों में ,
सपनों की ही क्यूँ बात करें हम |
चौसठ के हो गए हम ,
बच्चों जैसी क्यूँ बात करें हम |
विश्वगुरु का दर्ज़ा था पहले ,
पश्चिमी सभ्यता की क्यूँ बात करें हम |
ज्ञान-विज्ञानं आज भी है शंकर
अपने स्वार्थ की क्यूँ बात करें हम|
झंडा ऊँचा रहेगा हमेशा लेकिन,
चिंतन को ऊँचा रखने की बात करे हम|

                         शंकर गोयल पिथोरा 
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मंगलवार, 17 मई 2011

उम्मीद अभी बाकी है

उम्मीद अभी बाकी है ...
नैतिक  पतन  में भी
उत्थान  की उम्मीद ,
अभी बाकी है
विचारों  के दूषित कलुषित ,
होने से बचने की
उम्मीद अभी बाकी है
सामाजिक जड़ता से ग्रसित
समाज में परिवर्तन की
उम्मीद अभी बाकी है
देश में फैले भ्रष्टाचार ,
को ख़त्म करने
उम्मीद अभी बाकी है
समस्या की काली छाया ,
से निजात पाने की ,
उम्मीद अभी बाकी है   
देश में चल रहे षड्यंत्रों का
पर्दाफाश होने की
उम्मीद अभी बाकी है
कलयुग में हो रहे
पाप व अपराध के लिए ,
संहारक अवतार की ,
उम्मीद अभी बाकी है
क्योकि मानव में ,
मानवता के गुण
अभी बाकी है ..........

   शंकर गोयल 
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रविवार, 15 मई 2011

भाषा -भावना-व-चिंतन

भाषा -भावना-व-चिंतन
करुणा भाव भाषा व विचारो से,
मिलकर बनती है कविता,
जैसे माँ नवजात शिशु से,
किशोर होने पर बोध ,
कराती है अच्छे बुरे का|
वैसे ही कविता भी,
बोध कराती है समाज की,
विसंगतियो व विद्रूपताओ का |
माँ युवा बेटे को ,
आस्था व आत्मविश्वास ,
का पाठ पढ़ाती है ताकि ,
जीवन के हर कदम पर,  
सफलता उसके साथ रहे|
वैसे ही कविता भी बताती,
 है जनभावानाओ  को, 
गरीबी ,अशिक्षा व अन्य ,
समस्याओ से जूझने का ?
सहज व निश्चित पथ |

      शंकर गोयल  
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दो क्षणिकाएँ

दो क्षणिकाएँ
     [१]
वे गवाही देने,
 से कतराते है,
क्योकि अपराधी,
आखिर बच ही जाते है|

     [२]
वे तारीफ भी ,
दिन, तारीख देखकर ,
करते है क्योकि वे,
भविष्य से नहीं ,
वर्तमान से डरते है|

            शंकर गोयल,पिथोरा 
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मंगलवार, 10 मई 2011

आदमी किसका ?



आदमी किसका ?
आज एक सवाल ,
दानव की तरह ,
खड़ा है ,
मानव किसका ?
पत्नी का ,नेता का ,
राजनीतिक दल का,
या धर्म का |
इस दलदल से,
निकलने का है,
 कोई रास्ता,
तभी तो संभव होगा ,
दानव से मानव ,
होने का | 
             शंकर गोयल,पिथोरा 
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सोमवार, 9 मई 2011

जूते की महिमा

 जूते की महिमा 
          जूती
        पैरो में हो,
     अच्छी लगती है |
       सिर पर नहीं ,
    इस कहावत के प्रत्युतर में ,
       जूती ने कहा-
    मानव का इतिहास,
         गवाह है, 
    जितना पुराना उसका 
    उतना मेरा भी 
    इतिहास पुराना है 
    इन्सान डरता है ,
       में उससे 
    कंही आगे न बढ जाऊ
       सवाल ,
     अहमियत का है ,
     नहीं तो वह,
     स्वंय कहता है,
     दो जूते मारों,
    अक्ल ठिकाने आ जाएगी ,
    मेरी महता तभी लोगो के,
                समझ में आएगी | 

                शंकर गोयल  
                  MOBILE 9424235208                              

रविवार, 8 मई 2011

तुलना

कविता 
तुलना  

रावण प्रतीक है, 
बुराइयों का |
प्रतीक बुराई का 
जला दिया  जाता है
विजयादशमी  को 
 मान लिया जाता है  |
 बुराई पर सच्चाई की जीत                                     
                       रावण प्रतीक ,
                  क्यों नहीं बनता ?
             भ्रष्टाचार ,भ्रष्ट आचार ,
       विचार व् कमजोरियों का,
         रावणजानकर ,मानकर ,
           क्यों नहीं जलाया जाता,
         भ्रष्टाचारियो के पुतले को,
           आएगा ,होगा, एक दिन,
                    होगा  ऐसा जरुर ,
                      और समाज की ,
                 बुराइयाँ जाएँगी दूर |
                     शंकर गोयल,पिथोरा 
                 MOBILE-9424235208
    


गुरुवार, 5 मई 2011

खून से लथपथ

    खून से लथपथ  
                                                        
वह पड़ा था ,
सड़क किनारे  
खून से लथपथ 
इंतजार कर रहा था
उस पल का जिस पर 
उसकी मौत लिखी थी 
क्योकि वह जानता
जिन्दगी मौत से 
बदतर है |

शंकर गोयल,पिथोरा 
Shankar.pithora@gmail.com 
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अस्तित्व की लड़ाई


  अस्तित्व की लड़ाई

एक नन्हा पौधा,
अपने अस्तित्व की रक्षा की |
लड़ाई लड़ेंगे जरुर ,
हवा से, पानी से,धुप से |
क्योकि वह जानता है,
संघर्ष ही जीवन है |


शंकर गोयल, पिथोरा
shankar.pithora@gmail.com 
MOBILE  8871645600 
       

                                                     
                                            

                                                          







गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

नारों की गूंज

 



     नारों की गूंज
नारों की गूंज से गूंजता आकाश है |       
क्या किया  है तुमने ये कैसा विकास है |
किये थे वादे तुमने लोगो से  बडचढ़कर, 
फिर  भला क्यूँ उनका टूटता विश्वास  है |              
अंधकार और गहन  होता ही जा रहा ,
न जाने किस कोने में दुबका प्रकाश है |
पुलिस तो होती रही रोज ही बदनाम ,
क्योंकि थाने के आस- पास मिल रही लाश है |
राहत के काम से जनता बेहद आहत है,
क्युंकी हिस्से की बात  में ठेकेदारों में टास है |    
नारों की गूंज से गूंजता आकाश है |       
क्या किया है तुमने ये कैसा विकास है 
                                                                                         
शंकर गोयल,पिथोरा 
Shankar.pithora@gmail.com
MOBILE 8871645600  

सोमवार, 14 मार्च 2011

निवेदन


निवेदन 

गुरुदेव  तुम्हारे  चरणों में ,
अभिनन्दन  है अभिनन्दन है|
राग -द्वेष के भाव मिटाए 
प्रेमभाव -सद्भाव बडाये |
अन्तर्मन  की गहराई से
करते तुमको वंदन है |
गुरुदेव तुम्हारे चरणों में ,
अभिनन्दन  है अभिनन्दन है|
मुश्किलों में राह दिखाए
संघर्षपथ  को सरल बनाये
दुर्व्यसनो की लत छुढ़वाए 
भक्तो के दुःख-कष्ट मिटाए
चरण -धुल गुरुदेव आपकी,
मेरे लिए तो चन्दन है | 
गुरुदेव तुम्हारे चरणों में ,
अभिनन्दन  है अभिनन्दन है|
मन की बात किसे बताये
नैया कैसे पार लगाये | 
मंजिल तक कैसे पहुंचे हम
गुरवरहमको राह बताये 
अब तो मन में आपके लिए 
भक्तिभाव का बंधन है | 
गुरुदेव तुम्हारे चरनो मे 
अभिनन्दन  है अभिनन्दन है|

शंकर गोयल, पिथोरा
shankar.pithora@gmail.com
MOBILE 8871645600
 


गजल

        गजल

बहुत कुछ सोचकर बोलता हूँ मैं  ,
बोलने से पहलेशब्द  तोलता  हूँ मैं | 
जहर बन गई है जिंदगी जिनकी,
उनके जीवन में  मिठास घोलता हूँ मैं|
कडवी है यादे ,उदास है मन  जिनका ,
खुशियों का पिटारा खोलता हूँ मैं |
जीवन में विफल न हो कोई कभी ,
सफलता के दरवाजे खोलता हूँ  मैं|
राजनीति मायानगरी है दोस्तों ,
सपने ही सपने है बोलता हूँ मैं |
जग में खुशनसीब हर कोई नहीं ' शंकर '
मेहनत करो ज्ञान चक्षु  खोलता हूँ मैं | 

शंकर गोयल,पिथोरा 
Shankar.pithora@gmail.com
MOBILE 8871645600











          गजल

बहुत कुछ सोचकर बोलता हूँ मैं  ,
बोलने से पहलेशब्द  तोलता  हूँ मैं | 
जहर बन गई है जिंदगी जिनकी,
उनके जीवन में  मिठास घोलता हूँ मैं|
कडवी है यादे ,उदास है मन  जिनका ,
खुशियों का पिटारा खोलता हूँ मैं |
जीवन में विफल न हो कोई कभी ,
सफलता के दरवाजे खोलता हूँ  मैं|
राजनीति मायानगरी है दोस्तों ,
सपने ही सपने है बोलता हूँ मैं |
जग में खुशनसीब हर कोई नहीं ' शंकर '
मेहनत करो ज्ञान चक्षु  खोलता हूँ मैं | 

शंकर गोयल,पिथोरा 
Shankar.pithora@gmail.com
MOBILE 8871645600

रविवार, 13 मार्च 2011

रोटी का सवाल है


( रोटी का सवाल है ) 

भूख के लिए रोटी का सवाल है 
इस  सवाल ने  ही  देश  में  मचाया बवाल है 
जनता  की जरुरत व सरकार की नीयत 
के बीच में लम्बी चौड़ी दीवार है 

शंकर गोयल, पिथोरा
shankar.pithora@gmail.com  
MOBILE 8871645600   

                                     









गुरुवार, 10 मार्च 2011

गीत


            गीत
तुम पुराने उसूलो पर अड़े हो ,
इसलिए तुम जंहा थे वहीखड़े हो |
देश को आजाद करने के लिए,
क्या तुम सब इसलिए लड़े हो|
सुधारना है लोगो के विचारो को,
तुम विचारक्रांति के इंतजार में पड़े हो|
जानते हो गलती की है उसने,
फिर भी माफ़ कर अपनों में बड़े हो|
सबकी खुशियाँ बढाने के लिए,
खुद पैंट में अपनी टाट का पैबंद जड़े हो|
तुम पुराने उसूलो पर अड़े हो ,
इसलिए तुम जंहा थे वही खड़े हो |


                    शंकर गोयल, पिथोरा
        shankar.pithora@gmail.com
            MOBILE NO.-  8871645600 















          




  

रविवार, 6 मार्च 2011


( संघर्ष )                                                     
हमको आगे बढ़ना होगा, 
कदम कदम पर लड़ना होगा|
संघर्षो की राहों पर,
काँटों पर ही चलना होगा | 
लड़ना है तो डरना क्या,
मरने से फिर डरना क्या |
डरना हमने छोड़ दिया है ,
लड़ना हमने सीख लिया है |
दमन चक्र चलाओ तुम ,
कानून से डराओ तुम |
हमको आगे बदना होगा ,
कदम कदम पर लड़ना होगा |
 

शंकर गोयल,पिथोरा                           
shankar.pithora@gmail.com
mobile  8871645600