नारों की गूंज
नारों की गूंज से गूंजता आकाश है |
क्या किया है तुमने ये कैसा विकास है |
किये थे वादे तुमने लोगो से बडचढ़कर,
फिर भला क्यूँ उनका टूटता विश्वास है |
अंधकार और गहन होता ही जा रहा ,
न जाने किस कोने में दुबका प्रकाश है |
पुलिस तो होती रही रोज ही बदनाम ,
क्योंकि थाने के आस- पास मिल रही लाश है |
राहत के काम से जनता बेहद आहत है,
क्युंकी हिस्से की बात में ठेकेदारों में टास है |
नारों की गूंज से गूंजता आकाश है |
शंकर गोयल,पिथोरा
Shankar.pithora@gmail.com
MOBILE 8871645600
क्युंकी हिस्से की बात में ठेकेदारों में टास है |
नारों की गूंज से गूंजता आकाश है |
क्या किया है तुमने ये कैसा विकास है
शंकर गोयल,पिथोरा
Shankar.pithora@gmail.com
MOBILE 8871645600