ग़ज़ल

मंगलवार, 17 मई 2011

उम्मीद अभी बाकी है

उम्मीद अभी बाकी है ...
नैतिक  पतन  में भी
उत्थान  की उम्मीद ,
अभी बाकी है
विचारों  के दूषित कलुषित ,
होने से बचने की
उम्मीद अभी बाकी है
सामाजिक जड़ता से ग्रसित
समाज में परिवर्तन की
उम्मीद अभी बाकी है
देश में फैले भ्रष्टाचार ,
को ख़त्म करने
उम्मीद अभी बाकी है
समस्या की काली छाया ,
से निजात पाने की ,
उम्मीद अभी बाकी है   
देश में चल रहे षड्यंत्रों का
पर्दाफाश होने की
उम्मीद अभी बाकी है
कलयुग में हो रहे
पाप व अपराध के लिए ,
संहारक अवतार की ,
उम्मीद अभी बाकी है
क्योकि मानव में ,
मानवता के गुण
अभी बाकी है ..........

   शंकर गोयल 
shankar.pithora@gmail.com
MOBILE-9424235208

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