ग़ज़ल

सोमवार, 14 मार्च 2011

गजल

        गजल

बहुत कुछ सोचकर बोलता हूँ मैं  ,
बोलने से पहलेशब्द  तोलता  हूँ मैं | 
जहर बन गई है जिंदगी जिनकी,
उनके जीवन में  मिठास घोलता हूँ मैं|
कडवी है यादे ,उदास है मन  जिनका ,
खुशियों का पिटारा खोलता हूँ मैं |
जीवन में विफल न हो कोई कभी ,
सफलता के दरवाजे खोलता हूँ  मैं|
राजनीति मायानगरी है दोस्तों ,
सपने ही सपने है बोलता हूँ मैं |
जग में खुशनसीब हर कोई नहीं ' शंकर '
मेहनत करो ज्ञान चक्षु  खोलता हूँ मैं | 

शंकर गोयल,पिथोरा 
Shankar.pithora@gmail.com
MOBILE 8871645600











          गजल

बहुत कुछ सोचकर बोलता हूँ मैं  ,
बोलने से पहलेशब्द  तोलता  हूँ मैं | 
जहर बन गई है जिंदगी जिनकी,
उनके जीवन में  मिठास घोलता हूँ मैं|
कडवी है यादे ,उदास है मन  जिनका ,
खुशियों का पिटारा खोलता हूँ मैं |
जीवन में विफल न हो कोई कभी ,
सफलता के दरवाजे खोलता हूँ  मैं|
राजनीति मायानगरी है दोस्तों ,
सपने ही सपने है बोलता हूँ मैं |
जग में खुशनसीब हर कोई नहीं ' शंकर '
मेहनत करो ज्ञान चक्षु  खोलता हूँ मैं | 

शंकर गोयल,पिथोरा 
Shankar.pithora@gmail.com
MOBILE 8871645600

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