ग़ज़ल शरद पूर्णिमा पर विशेष ...........
आसमां से अमृत बरसेगा , चाँद का मन भी हरसेगा|
जीवन के स्वप्न चित्रों में ,कर्मतुलिका से रंग बरसेगा |
शरद पूर्णिमा के इस अवसर पर ,अब चकोर नहीं तरसेगा |
हर मन की प्यास बुझाने को, आनंद ही आनंद बरसेगा|
शंकर गोयल
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