ग़ज़ल

मंगलवार, 8 अक्टूबर 2013

संगी चुनाव ह मुड़ म आगे हे ,
नेता ह लंद-फंद करके नन्दागेहे|
कभू कहेथे कछु ,कभू करिथे कछु ,
लागथे नेतामन बहियागे हे |
संगी चुनाव ह मुड़ म आगे हे ,
नेता ह लंद-फंद करके नन्दागेहे|
कुर्सी पाय बर का-का कर हीं |
कुर्सी म नेता मन मोहगे हे,
मनखे -मनखे के मन ल जाने बर ,
मंद ,बोकरा,मुर्गी ह रखागे हे |
संगी चुनाव ह मुड़ म आगे हे ,
नेता ह लंद-फंद करके नन्दागेहे|
बोंट सबके ओला मिल जाए ,
ओखर बर बोकरा के बदना ह बदागे हे 
संगी चुनाव ह मुड़ म आगे हे ,
नेता ह लंद-फंद करके नन्दागेहे|

                 शंकर गोयल 
                shankar.pithora@gmail.com 
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