ग़ज़ल

सोमवार, 14 मार्च 2011

निवेदन


निवेदन 

गुरुदेव  तुम्हारे  चरणों में ,
अभिनन्दन  है अभिनन्दन है|
राग -द्वेष के भाव मिटाए 
प्रेमभाव -सद्भाव बडाये |
अन्तर्मन  की गहराई से
करते तुमको वंदन है |
गुरुदेव तुम्हारे चरणों में ,
अभिनन्दन  है अभिनन्दन है|
मुश्किलों में राह दिखाए
संघर्षपथ  को सरल बनाये
दुर्व्यसनो की लत छुढ़वाए 
भक्तो के दुःख-कष्ट मिटाए
चरण -धुल गुरुदेव आपकी,
मेरे लिए तो चन्दन है | 
गुरुदेव तुम्हारे चरणों में ,
अभिनन्दन  है अभिनन्दन है|
मन की बात किसे बताये
नैया कैसे पार लगाये | 
मंजिल तक कैसे पहुंचे हम
गुरवरहमको राह बताये 
अब तो मन में आपके लिए 
भक्तिभाव का बंधन है | 
गुरुदेव तुम्हारे चरनो मे 
अभिनन्दन  है अभिनन्दन है|

शंकर गोयल, पिथोरा
shankar.pithora@gmail.com
MOBILE 8871645600
 


गजल

        गजल

बहुत कुछ सोचकर बोलता हूँ मैं  ,
बोलने से पहलेशब्द  तोलता  हूँ मैं | 
जहर बन गई है जिंदगी जिनकी,
उनके जीवन में  मिठास घोलता हूँ मैं|
कडवी है यादे ,उदास है मन  जिनका ,
खुशियों का पिटारा खोलता हूँ मैं |
जीवन में विफल न हो कोई कभी ,
सफलता के दरवाजे खोलता हूँ  मैं|
राजनीति मायानगरी है दोस्तों ,
सपने ही सपने है बोलता हूँ मैं |
जग में खुशनसीब हर कोई नहीं ' शंकर '
मेहनत करो ज्ञान चक्षु  खोलता हूँ मैं | 

शंकर गोयल,पिथोरा 
Shankar.pithora@gmail.com
MOBILE 8871645600











          गजल

बहुत कुछ सोचकर बोलता हूँ मैं  ,
बोलने से पहलेशब्द  तोलता  हूँ मैं | 
जहर बन गई है जिंदगी जिनकी,
उनके जीवन में  मिठास घोलता हूँ मैं|
कडवी है यादे ,उदास है मन  जिनका ,
खुशियों का पिटारा खोलता हूँ मैं |
जीवन में विफल न हो कोई कभी ,
सफलता के दरवाजे खोलता हूँ  मैं|
राजनीति मायानगरी है दोस्तों ,
सपने ही सपने है बोलता हूँ मैं |
जग में खुशनसीब हर कोई नहीं ' शंकर '
मेहनत करो ज्ञान चक्षु  खोलता हूँ मैं | 

शंकर गोयल,पिथोरा 
Shankar.pithora@gmail.com
MOBILE 8871645600

रविवार, 13 मार्च 2011

रोटी का सवाल है


( रोटी का सवाल है ) 

भूख के लिए रोटी का सवाल है 
इस  सवाल ने  ही  देश  में  मचाया बवाल है 
जनता  की जरुरत व सरकार की नीयत 
के बीच में लम्बी चौड़ी दीवार है 

शंकर गोयल, पिथोरा
shankar.pithora@gmail.com  
MOBILE 8871645600   

                                     









गुरुवार, 10 मार्च 2011

गीत


            गीत
तुम पुराने उसूलो पर अड़े हो ,
इसलिए तुम जंहा थे वहीखड़े हो |
देश को आजाद करने के लिए,
क्या तुम सब इसलिए लड़े हो|
सुधारना है लोगो के विचारो को,
तुम विचारक्रांति के इंतजार में पड़े हो|
जानते हो गलती की है उसने,
फिर भी माफ़ कर अपनों में बड़े हो|
सबकी खुशियाँ बढाने के लिए,
खुद पैंट में अपनी टाट का पैबंद जड़े हो|
तुम पुराने उसूलो पर अड़े हो ,
इसलिए तुम जंहा थे वही खड़े हो |


                    शंकर गोयल, पिथोरा
        shankar.pithora@gmail.com
            MOBILE NO.-  8871645600 















          




  

रविवार, 6 मार्च 2011


( संघर्ष )                                                     
हमको आगे बढ़ना होगा, 
कदम कदम पर लड़ना होगा|
संघर्षो की राहों पर,
काँटों पर ही चलना होगा | 
लड़ना है तो डरना क्या,
मरने से फिर डरना क्या |
डरना हमने छोड़ दिया है ,
लड़ना हमने सीख लिया है |
दमन चक्र चलाओ तुम ,
कानून से डराओ तुम |
हमको आगे बदना होगा ,
कदम कदम पर लड़ना होगा |
 

शंकर गोयल,पिथोरा                           
shankar.pithora@gmail.com
mobile  8871645600