ग़ज़ल

मंगलवार, 8 अक्टूबर 2013

नेता जी के चेहरे पर तनाव आया ,
लगता है देश में चुनाव आया |
मतदाता की पंसद नापंसद का ख्याल कर,
न्यायपालिका का फरमान है आया |
वोटिंग मशीन का अब एक बटन ,
जनता जनार्दन के मन का आया|
नेता जी के चेहरे पर तनाव आया ,
लगता है देश में चुनाव आया |
नेता जी के चेहरे पर तनाव आया ,
लगता है देश में चुनाव आया |
दागी मंत्री,अपराधी,गुंडे ,
देश को तोड़ने वाले झंडे-मुंडे|
गाज गिरेगी इन सब पर भी ,
इसका भी आदेश है आया |
नेता जी के चेहरे पर तनाव आया ,
लगता है देश में चुनाव आया |
आते रहे,करते रहे सालों मनमानी ,
जनता के दुःख-दर्द की नित-नई कहानी|
जनतंत्र की पीठ पर दे गए नयी निशानी
जनमन की कष्टों की हो गई जुबानी |
नेता जी के चेहरे पर तनाव आया ,
लगता है देश में चुनाव आया |


                   शंकर गोयल 
                shankar.pithora@gmail.com 
                 MOBILE NO.-9424235208
संगी चुनाव ह मुड़ म आगे हे ,
नेता ह लंद-फंद करके नन्दागेहे|
कभू कहेथे कछु ,कभू करिथे कछु ,
लागथे नेतामन बहियागे हे |
संगी चुनाव ह मुड़ म आगे हे ,
नेता ह लंद-फंद करके नन्दागेहे|
कुर्सी पाय बर का-का कर हीं |
कुर्सी म नेता मन मोहगे हे,
मनखे -मनखे के मन ल जाने बर ,
मंद ,बोकरा,मुर्गी ह रखागे हे |
संगी चुनाव ह मुड़ म आगे हे ,
नेता ह लंद-फंद करके नन्दागेहे|
बोंट सबके ओला मिल जाए ,
ओखर बर बोकरा के बदना ह बदागे हे 
संगी चुनाव ह मुड़ म आगे हे ,
नेता ह लंद-फंद करके नन्दागेहे|

                 शंकर गोयल 
                shankar.pithora@gmail.com 
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बुधवार, 8 मई 2013

बुलंदी देर तक किस शख्स के हिस्से में रही .
बहुत ऊँची ईमारत हर घड़ी खतरे में रहती है |
                                           मुन्नवर राणा
दिखाती है हमें मजबूरियां ऐसे भी  दिन अक्सर ,
उठानी पड़ती है फिर से हमें फेकी हुई चीज़े ।
                                  हस्तीमल 'हस्ती '
परखना मत परखने से कोई अपना नहीं रहता ,
किसी भी आईने में देर तक चेहरा नहीं रहता ।
बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फासला रखना ,
जंहा दरिया समुन्दर से मिला दरिया नहीं रहता ।
                                              बशीर चन्द्र                              

हम कुछ ऐसे तेरे दीदार में खो जाते है ,
जैसे बच्चें भरे बाज़ार में खो जाते है ।

शीशे में कुछ महल बनाओ ,आशाओं  के दीप जलाओ ,
पैर चुभे कांटे को भी तुम ,हौले से थोड़ा सहलाओं ।
चंद हुआ के थाल सजाओं ,आँगन में खुशियाँ बिखराओं ,
अंधकार में हाथ पकड़कर ,परछाई का साथ निभाओं ।
चाहें फुलझड़ी हो छोटी ,भूखे को मिल जाए रोटी ,
इस  गरीब की  कुटिया में तुम ,नन्हा सा एक दीप जलाओं ।                         

शनिवार, 5 जनवरी 2013

कौन करे सुनवाई रे भईया कौन करे ,
कौन करे अगुवाई रे भईया कौन करे ।
चोर-चोर  मौसेरे  भाई  कौन   करे,
भ्रष्टाचार  में है बड़ी कमाई कौन करे ।
लगता है नेता बन  गए ,देश के घर जंवाई,
कौन करे सुनवाई रे भईया कौन करे ,
कौन करे अगुवाई रे भईया कौन करे ।
राजनीति व भ्रष्टाचार का ,ऐसे रिश्ते ऐसे हो गया ,
राजनीति जैसे हो गई हो भ्रष्टाचार की लुगाई ।
जनता देती दुहाई जनमन को रुलाई , 
कौन करे सुनवाई रे भईया कौन करे ,
कौन करे अगुवाई रे भईया कौन करे ।
                                         शंकर गोयल 
                                shankar.pithora@gmail.com
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मंगलवार, 18 दिसंबर 2012

इतना अधिक तुम बोलते हो ,
अपनी कमियों को खोलते हो 
देश में हो रहे रोज हमलों को,
पाक-अफगान से तौलते हो,
तौलने का है शौक इतना ,
26/11 को 9/11से क्यों नहीं तौलते हो,
हमारे नेता कमजोर नहीं है लेकिन ,
न जाने किसका डर है इन्हें ,
अपनी जुबान से कुछ बोलते नहीं हो
                                    शंकर गोयल 
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शनिवार, 22 सितंबर 2012

हिंदी दिवस पर विशेष ..................
हिंदी भाषा रूहानी है,लगती सबको सुहानी है ।
लोगों की जुबानी है, हिंदी की कहानी है।
संस्कृतहै देवभाषा ,हिंदी उसकी रानी है ।
तत्सम,तदभव,देशज का नहीं है यंहा खेल।
जो आया इसका हुआ करती सबसे मेल ।
संस्कृत, अरबी,फारसी हो या इंग्लिश डच ।
सुनने वालों के दिलों को करती सदैव टच ।
राजनीति के चक्रव्यूह  में फंस गई हिंदी भाषा ।
चक्रव्यूह टूटेगा अभिमन्यु से नहीं,अर्जुन की है आशा ।
हिंदी, हिंदी भाषा है जन-जन की है शान ।
हिंदी गीताभाष्य है भारत का है सम्मान ।

                                   शंकर गोयल 
                          shankar.pithora@gmail.com 
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हिंदी दिवस पर विशेष ..................

      हिंदी भाषा ज्ञान है ,
     भाषा का वरदान है ।
     मिटटी की महक , संस्कृति ,
      अस्तित्व की पहचान है ।
       तानसेन की तान है ,
  भारतेन्दु ,द्विवेदी  का मान है ।
देश का सम्मान है ,
गणेश,भारतेंदु कह गए,
निज भाषा की कह गए ।
निज भाषा का मान नहीं,
पशु ,मृतक और जान नहीं ।
दिवस हिंदी का शान का ,
अपने और अपनों का मान का ।

                      शंकर गोयल 
shankar.pithora @gmail.com
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सोमवार, 30 अप्रैल 2012

गज़ल

        गज़ल

अब भला छोड़ के घर क्या करते
रात के समय सफर क्या करते 
तेरी  मजबूरियां जानते है हम 
अपने आने की खबर क्या करते 
जब सितारे ही नहीं मिल पाए 
ले के हम सूरज-चाँद क्या करते 
राय तो पहले से बना ली तुने
दिल में हम तेरे लिए घर क्या करते |
                           शंकर गोयल 
              Shankar.pithora@gmail.com
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मंगलवार, 6 मार्च 2012

फागुनी मधुमास

फागुनी मधुमास 
फागुन का मधुमास है आया ,
अपने साथ हास-परिहास है लाया।
नगाड़ों की थाप पर सबने ,
बहुत सुंदर गीत है गाया।
रंग-गुलाल की बात चली,
नाच रहे सब गली-गली !
फागुन का मधुमास है आया ,
अपने साथ हास-परिहास है लाया।
गूंजे फाग बज रहे है ढोल,
खुल रही है कितनो की पोल।
सब में मस्ती की आग लगी,
विचारों की सुंदर कलि खिली ।
होली ने सुंदर सन्देश सुनाया,
भाई-चारा सदभावका गान है गाया।
फागुन का मधुमास है आया ,
अपने साथ हास-परिहास है लाया।
                            शंकर गोयल 
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रंगों की होली

होली पर विशेष :-
                 रंगों की होली    
आई रंगों की होली,
सुनते  रहो मनचलों की बोली ।
कोई पिए भांग,
  कोई खाए भांग की गोली।
आज अनजान दीवानों की,
          निकल रही है टोली ।

आई रंगों की होली,
सुनते  रहो मनचलों की बोली ।
बज रहे नगाड़े व ढोल ,
फाग-गीतों में मनचलों की बोली।
बुजर्गों ने कहा-
         कि अब तो बहुत हो-ली ।
युवा तन-मन जागकर बोला ,
         यही हमारी होली ।

              शंकर गोयल 
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शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

मानवता की मिशाल
महासमुंद कोषालय के अधिकारी के.आर.नायक जी सहायक कोषालय अधिकारी के.के.दुबे लिपिक श्री केसराम  सिन्हा जी की पहल पर जिलाधीश के आदेश  पर एक सेवानिवृत प्रधानपाठक श्री तुलाराम डडसेना भविष्य निधि और अन्य राशि का  भुगतान करने के लिए पछाघात से पीड़ित प्रधान पाठक के घर बावनकेरा जिला महासमुंद में जाकर किया है जो की सराहनीय कार्य है जिसकी प्रंशसा सर्वत्र होनी चाहिए क्योंकि श्री तुला राम डडसेना जी सेवानिवृति के बाद पछाघात  से पीड़ित बिस्तर के ही होकर रह गए थे कोषालय महासमुंद के अधिकारीयों   ne   जब देखा कि तुलाराम डडसेना जी का  एक  माह से भुगतान की प्रक्रिया पूरी हो गई तो वे भुगतान राशि लेने क्यों नहीं आ रहे है पता करने पर यह बात सामने आई कि डडसेना जी कि तबियत बहुत ख़राब है और चल नहीं पा  रहे है बिस्तर से उठना भी मुश्किल हो रहा है पैसे कि भी बहुत आवश्यकता है जिलाधीश  जी को यह बात बताई गई जिलाधीश जी कि संवेदनशीलता कि बदौलत समस्त राशि और पेंशन भुगतान कि व्यवस्था कि गयी है ।  यह एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है

गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012

परीक्षा

परीक्षा 
सौतन बनकर आई होली,
परीक्षा के नाम पर,
शहीद होने की ठानी ,
स्कूली बच्चों ने एग्जाम  पर ,
कितने खरे उतरते है,
हिंदी-संस्कृत के ज्ञान पर,
गणित ,भौतिक या रसायन ,
विज्ञानं विधि सूत्र के विधान पर,
इंग्लिश तो है बहुत जरुरी ,
विज्ञानं के संधान पर,
कितने खरे उतरेंगे ये सब ,
इस परीक्षा महाभियान पर ।

                शंकर गोयल 
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शुक्रवार, 27 जनवरी 2012

राजनीति


       राजनीति 
सत्ता पाने की होड़ में ,
कुर्सी की अंधी दौड़ में, 
मानवता को मत धकेलों ,
साम्प्रदायिकता के खतरनाक मोड़ में ।
शोषित -पीड़ित मानवता करह रही है ,
सफेदपोशों की गन्दी राजनीति से ,
मुक्ति चाह रही है ।
 देश के कलमकारों ,
अन्याय के खिलाफ आओ ,
मानवता और देश की आवाज सुनो,
और इस आवाज में , 
अपनी आवाज को मिलाओ ।
                 शंकर गोयल
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"भईया जिंदाबाद "

"भईया जिंदाबाद "
        उनका बच्चा ,
चुनाव को नजदीक आता देख  ,
 कहता है -"भईया जिंदाबाद ",
मैंने पूछा -जिंदाबाद से तुम क्या समझे ?
उसने जिंदाबाद का विश्लेषण कुछ इस तरह किया,
भईया जिन्दा रहे ,आबाद रहे, तभी तो जिंदाबाद।
दुसरे ने कहा -भईया जिन्दा रहे , बाद में बात रहे ,
और वह भी भईया जी को अच्छे से याद रहे ,
यही भईया जिंदाबाद है ।
                                       शंकर गोयल 
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शनिवार, 21 जनवरी 2012

स्वंतत्रता का दीप

स्वंतत्रता के दीप जलाएं,
नफरत की दीवार गिराएँ,
जात-पात की बात न कर ,
देशप्रेम का दीप जलाएं ।
कठिन नहीं कुछ भी करना ,
दृढ संकल्पों की मीनार बनाये ,
जरुरत को कम करके हम,
हम देश को खुशहाल बनायें।
समस्या बहुत है 'शंकर ',
समाधान करने में हाथ बढ़ाएं ।
                            शंकर गोयल 
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सोमवार, 2 जनवरी 2012

नव वर्ष 2015

नव वर्ष 2015
नया साल हमारा कैसा हो ?
क्या बीता वर्ष हमारा वैसा हो ?
नवागत ,नवजात ,या अंकुरित ,
भविष्य सुनहरे सपनों जैसा हो|
हत्या, खून-खराबा,समस्याओं का,
लिबास ओढ़े काले  अध्याय  पैसा हो,
या कुछ नया कर गुजरने की लालसा ,
इन्सान में देश प्रहरी के भाव जैसा हो|
नववर्ष ,नवगीत ,नई चाहत से,
नवभावों,सदभावों से लबरेज ,
परिपूर्ण हो समृद्धि की कामनाएं ,
सबके लिए नववर्ष 2015 वैसा हो|

                            शंकर गोयल
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शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

शिक्षाकर्मियों का आन्दोलन

छत्तीसगढ़ के  संवेदशील  मुख्यमंत्री डॉक्टर श्री रमनसिंह जी का शिक्षाकर्मियो के संविलियन को लेकर साफ शब्दों  में एक लाख अस्सी हजार शिक्षाकर्मियों को कह दिया है  किशिक्षाकर्मियों का संविलियन शिक्षा विभाग में नहीं किया जा सकता क्योंकि इनकी सेवा शर्तों में यह शामिलनहीं है  इस तरह की मुंख्यमंत्री की घोषणा ने शिक्षाकर्मियों की निराश किया है दूसरी ओरउनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है |                 
                                                   गत वर्ष प्रधान पाठक परीक्षा के माध्यम से शिक्षाकर्मियों को शिक्षा विभाग प्रधान पाठक के रूप में लिया है और अपने संकल्प पत्र के अनुरूप, सुभाष  स्टेडियम रायपुर में आयोजित सम्मान समारोह में शिक्षाकर्मियों ,मीडिया ,पत्रकारों ,मंत्रियों के बीच डॉ. रमनसिंह जी ने अपने उदबोधन में इस बात का एलान किया था कि 
                 की भविष्य में  प्रदेश में कार्यरत शिक्षाकर्मियों में  २०% शिक्षाकर्मियों को शिक्षा विभाग,  आदिमजाति कल्याण  विभाग में संविलियन किया जायेगा किन्तु आज आपके  द्वारा  इस तरह का कथन समझ से परे है |
                                  प्रदेश के संवेदनशील  मुख्यमंत्री डॉ. श्री रमन सिंहजी  हमारें  राज्य को देश के सभी क्षेत्रों में अग्रणी राज्य के के रूप में प्रतिष्ठित करने सफलता पाई है|किन्तु शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक को कई नाम दिए गए साथ ही साथ   नियमित शिक्षक और शिक्षाकर्मी के वेतन , सुविधाओं में काफी  अंतर कर दिया गया  जो  असंतोष का मूल कारण है| महंगाई अपनी चरम उत्कर्ष पर हैशिक्षाकर्मियों को अल्प वेतन का भुगतानअनियमित होना सारी सुविधाओं से वंचित होना ही आन्दोलन कि राह पर चलने के लिए मजबूर करती है ओर समय समय पर इनके आन्दोलन दिखाई देते है सरकार ओर जनता इनकी समस्याओं को समझने कि बजाय  छात्र छात्राओं कि दुहाई देकर आन्दोलन ख़त्म करने कि अपील करते है शिक्षाकर्मियों के आन्दोलन को गलत समय में लिया गया निर्णय कहकर शिक्षाकर्मियों के प्रति सहानुभूति भी नहीं रखते है| बल्कि उन्हें कई नए नामों से विश्लेषित कर दिया जाता है शिक्षाकर्मियों को जो अल्प वेतन मिलता है उस अल्प वेतन  का भुगतान भी समय  पर नहीं होता,और न ही  प्रति माह नियमित रूप से  वेतनमिलता  है |  आदरणीय शिक्षामंत्री श्री बृजमोहन अग्रवालजी ने वेतन भुगतान के संबध में कहा था कि शिक्षाकर्मियों का वेतन भुगतान का सरलीकरण करते हुए कोषालय के माध्यम से 
किया जायेगा लेकिन आज तक उनकी यह  बात, बात के रूप में रह गई |जबकि इस तरह कोषालय से भुगतान में किसी तरह की दिक्कत नहीं है क्योंकि वेतन बिल कोषालय से ही जारी होते है,सीधे वंही से शिक्षाकर्मियों के बैंक खातें में अन्य कर्मचारियों की तरह जमा हो सकते है| क्योकि आंबटन कोषालय में रहता ही है | 
                    आदरणीय संवेदनशील मुख्यमंत्री जी इन वचनों पर हरिभूमि में त्वरित टिप्पणी में डॉ.हिमांशु द्विवेदी जी ने ' कोयल के कंठ से कर्कश स्वर 'में शिक्षाकर्मियों की सारी समस्याओं ,उनके आन्दोलन ,सरकार के द्वारा इस आन्दोलन को कुचलने के लिए उठाये गए क़दमों एस्मा का खौफ आदि बातों पर विस्तार से कही है शिक्षाकर्मियों का प्रदेश में अन्य कर्मचारियों के साथ तुलना कर शिक्षक और शिक्षाकर्मी का अंतर बताकर शिक्षाकर्मियों  के दर्द को कहा है | में  डॉ. हिमाशु द्विवेदी जी के विचारों से पूरी तरह से सहमत हूँ और उन्हें  उनके शिक्षाकर्मियों के प्रति सुविचारों के लिए धन्यवाद् देना चाहता हूँ |




                                                                                               शंकर गोयल 
                                                                                shankar.pithora@mail.com
                                                                                MOBILE NO.9424235208

शनिवार, 5 नवंबर 2011

ग़ज़ल

                       ग़ज़ल 
हमारा देश किस ओर जा रहा है दोस्तों,
इसे भ्रष्टाचार दीमक की तरह खा रहहि दोस्तों|
अन्ना का दल देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ,
जनता के बीच अलख जगा रहा है दोस्तों|
आंकठ डूबे है देश के नेता भ्रष्टाचार में,
हर कोई इन पर तोहमत लगा रहा है दोस्तों|
जनसेवक का तमगा लगाये बैठे है ये लोग,
इसलिए देश इनके नखरें उठा रहा है दोस्तों|
भ्रष्टाचार लाईलाज बीमारी नहीं है दोस्तों,
युवा पीढ़ी जनवादी गीत गा रही है दोस्तों|
                                      शंकर गोयल
                  shankar.pithora@gmail.com
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बुधवार, 2 नवंबर 2011

रावण आज अनेक है राम बना न कोई,

अनर्थ देश में हो रहा धरतीमाता रोई |

कलयुग में भी कैसी प्रभु की माया है ,

मंदिरों में पड़ रही रावण की छाया है |
                                                शंकर गोयल 
                              shankar.pithora@gmail.com
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